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2017 में गण्ड मूल नक्षत्र कब होगा | 2017 में गण्ड मूल नक्षत्र के दिन और समय | गंडमूल नक्षत्र 2017

2017 भद्रा दोष

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भद्रा 2017

आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जनवरी 2017
5 जनवरी
2017
गुरूवार 04:45 PM7 जनवरी
2017
शनिवार 02:19 PM
13 जनवरी
2017
शुक्रवार 11:50 PM15 जनवरी
2017
रविवार 10:44 PM
23 जनवरी
2017
सोमवार 01:57 PM25 जनवरी
2017
बुधवार 06:47 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र फ़रवरी 2017
1 फ़रवरी
2017
बुधवार 10:07 PM3 फ़रवरी
2017
शुक्रवार 08:02 PM
10 फ़रवरी
2017
शुक्रवार 09:40 AM12 फ़रवरी
2017
रविवार 08:40 AM
19 फ़रवरी
2017
रविवार 10:07 PM22 फ़रवरी
2017
बुधवार 03:18 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मार्च 2017
1 मार्च
2017
बुधवार 04:44 AM3 मार्च
2017
शुक्रवार 01:42 AM
9 मार्च
2017
गुरूवार 05:13 PM11 मार्च
2017
शनिवार 05:08 PM
19 मार्च
2017
रविवार 06:15 AM21 मार्च
2017
मंगलवार 11:52 AM
28 मार्च
2017
मंगलवार 01:41 PM30 मार्च
2017
गुरूवार 09:25 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अप्रैल 2017
5 अप्रैल
2017
बुधवार 10:53 PM7 अप्रैल
2017
शुक्रवार 11:35 PM
15 अप्रैल
2017
शनिवार 01:41 PM17 अप्रैल
2017
सोमवार 07:34 PM
25 अप्रैल
2017
मंगलवार 12:06 AM26 अप्रैल
2017
बुधवार 07:20 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मई 2017
3 मई
2017
बुधवार 04:33 AM5 मई
2017
शुक्रवार 05:03 AM
12 मई
2017
शुक्रवार 08:14 PM15 मई
2017
सोमवार 02:09 AM
22 मई
2017
सोमवार 10:11 AM24 मई
2017
बुधवार 06:03 AM
30 मई
2017
मंगलवार 11:58 AM1 जून
2017
गुरूवार 11:16 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जून 2017
30 मई
2017
मंगलवार 11:58 AM1 जून
2017
गुरूवार 11:16 AM
9 जून
2017
शुक्रवार 02:15 AM11 जून
2017
रविवार 08:06 AM
18 जून
2017
रविवार 06:30 PM20 जून
2017
मंगलवार 03:44 PM
26 जून
2017
सोमवार 09:23 PM28 जून
2017
बुधवार 07:18 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जुलाई 2017
6 जुलाई
2017
गुरूवार 08:25 AM8 जुलाई
2017
शनिवार 02:11 PM
16 जुलाई
2017
रविवार 12:49 AM17 जुलाई
2017
सोमवार 11:19 PM
24 जुलाई
2017
सोमवार 07:44 AM26 जुलाई
2017
बुधवार 04:52 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अगस्त 2017
2 अगस्त
2017
बुधवार 03:17 PM4 अगस्त
2017
शुक्रवार 09:03 PM
12 अगस्त
2017
शनिवार 06:14 AM14 अगस्त
2017
सोमवार 05:05 AM
20 अगस्त
2017
रविवार 05:23 PM22 अगस्त
2017
मंगलवार 02:44 PM
29 अगस्त
2017
मंगलवार 10:58 PM1 सितंबर
2017
शुक्रवार 04:48 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र सितंबर 2017
29 अगस्त
2017
मंगलवार 10:58 PM1 सितंबर
2017
शुक्रवार 04:48 AM
8 सितंबर
2017
शुक्रवार 12:32 PM10 सितंबर
2017
रविवार 10:38 AM
17 सितंबर
2017
रविवार 01:06 AM18 सितंबर
2017
सोमवार 11:24 PM
26 सितंबर
2017
मंगलवार 07:04 AM28 सितंबर
2017
गुरूवार 12:58 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अक्टूबर 2017
5 अक्टूबर
2017
गुरूवार 08:51 PM7 अक्टूबर
2017
शनिवार 05:52 PM
14 अक्टूबर
2017
शनिवार 06:54 AM16 अक्टूबर
2017
सोमवार 06:07 AM
23 अक्टूबर
2017
सोमवार 02:54 PM25 अक्टूबर
2017
बुधवार 08:49 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र नवंबर 2017
2 नवंबर
2017
गुरूवार 06:57 AM4 नवंबर
2017
शनिवार 03:29 AM
10 नवंबर
2017
शुक्रवार 12:26 PM12 नवंबर
2017
रविवार 11:33 AM
19 नवंबर
2017
रविवार 09:58 PM22 नवंबर
2017
बुधवार 03:51 AM
29 नवंबर
2017
बुधवार 05:13 PM1 दिसंबर
2017
शुक्रवार 02:29 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र दिसंबर 2017
29 नवंबर
2017
बुधवार 05:13 PM1 दिसंबर
2017
शुक्रवार 02:29 PM
7 दिसंबर
2017
गुरूवार 07:55 PM9 दिसंबर
2017
शनिवार 05:42 PM
17 दिसंबर
2017
रविवार 04:13 AM19 दिसंबर
2017
मंगलवार 10:10 AM
27 दिसंबर
2017
बुधवार 01:48 AM29 दिसंबर
2017
शुक्रवार 12:39 AM

गंडमूल

हिंदू नक्षत्र में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है, जिसमें कुछ नक्षत्र शुभ है और कुछ अशुभ माने गये हैं। इन अशुभ नक्षत्रों को गंडमूल कहा जाता है।ज्योतिष के अनुसार, इस श्रेणी में आने वाले नक्षत्र हैं अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। इन नक्षत्रों का आप पर शुभ और अशुभ प्रभाव पड़ता है। गंडमूल नक्षत्र में पैदा हुए बच्चों के जीवन में विभिन्न बाधाओं और समस्याएं आती हैं और इन समस्याओं के निवारण के लिए पूजा की आवश्यकता होती है ।

27 नक्षत्रों में केतु व बुध के अधिकार में आने वाले नक्षत्र गंडमूल कहलाते हैं। ये गंडमूल नक्षत्र अपने अंदर अशुभ व मारक प्रभाव रखते हैं ।

1- अश्विनी नक्षत्र- इस नक्षत्र का स्वामी केतु है और देवता अश्विनी कुमार हैं।

2- अश्लेषा नक्षत्र- बुध इस नक्षत्र के स्वामी हैं और सर्प देवता हैं।

3- मघा नक्षत्र- यह केतु का नक्षत्र हैं और पितृ देवता है।

4- ज्येष्ठा नक्षत्र- इस नक्षत्र के स्वामी बुध है और इंद्र देवता हैं।

5- मूल नक्षत्र- मूल नक्षत्र के स्वामी केतु है और राक्षस इसके देवता है।

6- रेवती नक्षत्र- इसके स्वामी बुध हैं और पूषा इसके देवता है।

क्यों होता है गंडमूल नक्षत्र

हिंदू ज्योतिष के अनुसार नक्षत्र, राशि और लग्न के संधि काल को अशुभ माना जाता है और गंडमूल नक्षत्र संधि नक्षत्र होत हैं इसलिए आप पर इसका अशुभ प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। गंडमूल नक्षत्रों के देवता भी बुरे प्रभाव प्रदान करते हैं। ये नक्षत्र मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु व मीन राशि के आरंभ व अंत में आते हैं। इन राशियों का प्रभाव आपके शरीर, मन, बुद्धि, आयु, भाग्य आदि पर पड़ता है और गंडमूल का प्रभाव भी इन्हीं के ऊपर देखने को मिलता है ।

गंडमूल दोष का प्रभाव

यदि कोई आप गंडमूल नक्षत्र में पैदा होते हैं तो आपको और आपके परिजनों को निम्न कष्टों का सामना करना पड़ सकता है-

1- आपको स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का सामना करना पड़ता है ।

1- आपके माता पिता व भाई बहनों के जीवन पर बाधाएं आती हैं ।

1- आपके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।

1- आपको जीवनयापन में संघर्ष का सामना करना पड़ता है ।

1- परिवार में दरिद्रता आती है ।

1- दुर्घटना का भय बना रहता है ।

आपको बता दें कि मघा नक्षत्र के पहले दो चरण में ही माता और पिता को कष्ट होता है, बाकी के दो चरणों में बच्चे को अच्छा खासा धन व उच्च शिक्षा प्राप्त होती है ।

उपचार-

गंडमूल अश्विनी, मूल या मग में पैदा हुए है तो नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करें, बुधवार या गुरुवार को भूरे रंग के कपड़े दान करें।बच्चे के जन्म के 27वें दिन बाद शांति पूजा किया जाना चाहिए और जब तक शांति पूजा ना हो जाए तब तक पिता को बच्चे का चेहरा नहीं देखना चाहिए ।

गंडमूल अश्लेषा, ज्येष्ठ और रेवती में पैदा हुए बच्चे के लिए बुधवार को हरी सब्जियां, धनिया, पन्ना, भूरे रंग के बर्तन और आंवला का दान करें। शिशु पूजा बच्चे के जन्म के 37वें दिन बाद किया जाना चाहिए, लेकिन 10वीं या 19वें दिन भी किया जा सकता है। यदि ऐसा करना संभव नहीं है तो चंद्रमा जन्म नक्षत्र स्थिति में लौटने पर शांति पूजा करें ।