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2018 में गण्ड मूल नक्षत्र कब होगा | 2018 में गण्ड मूल नक्षत्र के दिन और समय | गंडमूल नक्षत्र 2018

2018 भद्रा दोष

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भद्रा 2018

आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जनवरी 2018
4 जनवरी
2018
गुरूवार 06:08 AM6 जनवरी
2018
शनिवार 02:16 AM
13 जनवरी
2018
शनिवार 10:15 AM15 जनवरी
2018
सोमवार 04:20 PM
23 जनवरी
2018
मंगलवार 08:09 AM25 जनवरी
2018
गुरूवार 08:22 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र फ़रवरी 2018
31 जनवरी
2018
बुधवार 05:36 PM2 फ़रवरी
2018
शुक्रवार 01:00 PM
9 फ़रवरी
2018
शुक्रवार 04:56 PM11 फ़रवरी
2018
रविवार 11:00 PM
19 फ़रवरी
2018
सोमवार 01:39 PM21 फ़रवरी
2018
बुधवार 02:02 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मार्च 2018
28 फ़रवरी
2018
बुधवार 03:52 AM1 मार्च
2018
गुरूवार 11:48 PM
9 मार्च
2018
शुक्रवार 12:46 AM11 मार्च
2018
रविवार 06:29 AM
18 मार्च
2018
रविवार 08:11 PM20 मार्च
2018
मंगलवार 07:45 PM
27 मार्च
2018
मंगलवार 11:28 AM29 मार्च
2018
गुरूवार 08:40 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अप्रैल 2018
5 अप्रैल
2018
गुरूवार 09:20 AM7 अप्रैल
2018
शनिवार 02:34 PM
15 अप्रैल
2018
रविवार 04:29 AM17 अप्रैल
2018
मंगलवार 03:13 AM
23 अप्रैल
2018
सोमवार 05:04 PM25 अप्रैल
2018
बुधवार 03:07 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मई 2018
2 मई
2018
बुधवार 05:39 PM4 मई
2018
शुक्रवार 10:34 PM
12 मई
2018
शनिवार 01:52 PM14 मई
2018
सोमवार 12:31 PM
20 मई
2018
रविवार 10:45 PM22 मई
2018
मंगलवार 08:29 PM
30 मई
2018
बुधवार 12:56 AM1 जून
2018
शुक्रवार 05:53 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जून 2018
30 मई
2018
बुधवार 12:56 AM1 जून
2018
शुक्रवार 05:53 AM
8 जून
2018
शुक्रवार 11:03 PM10 जून
2018
रविवार 10:30 PM
17 जून
2018
रविवार 06:21 AM19 जून
2018
मंगलवार 02:47 AM
26 जून
2018
मंगलवार 07:08 AM28 जून
2018
गुरूवार 12:22 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जुलाई 2018
6 जुलाई
2018
शुक्रवार 06:55 AM8 जुलाई
2018
रविवार 07:39 AM
14 जुलाई
2018
शनिवार 04:07 PM16 जुलाई
2018
सोमवार 11:13 AM
23 जुलाई
2018
सोमवार 12:54 PM25 जुलाई
2018
बुधवार 06:22 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अगस्त 2018
2 अगस्त
2018
गुरूवार 01:13 PM4 अगस्त
2018
शनिवार 03:00 PM
11 अगस्त
2018
शनिवार 02:55 AM12 अगस्त
2018
रविवार 09:27 PM
19 अगस्त
2018
रविवार 07:14 PM22 अगस्त
2018
बुधवार 12:34 AM
29 अगस्त
2018
बुधवार 06:49 PM31 अगस्त
2018
शुक्रवार 08:47 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र सितंबर 2018
7 सितंबर
2018
शुक्रवार 12:57 PM9 सितंबर
2018
रविवार 08:02 AM
16 सितंबर
2018
रविवार 02:50 AM18 सितंबर
2018
मंगलवार 07:35 AM
26 सितंबर
2018
बुधवार 01:02 AM28 सितंबर
2018
शुक्रवार 02:24 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अक्टूबर 2018
4 अक्टूबर
2018
गुरूवार 08:50 PM6 अक्टूबर
2018
शनिवार 05:11 PM
13 अक्टूबर
2018
शनिवार 11:36 AM15 अक्टूबर
2018
सोमवार 03:35 PM
23 अक्टूबर
2018
मंगलवार 08:48 AM25 अक्टूबर
2018
गुरूवार 09:27 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र नवंबर 2018
1 नवंबर
2018
गुरूवार 02:35 AM2 नवंबर
2018
शुक्रवार 12:00 PM
9 नवंबर
2018
शुक्रवार 08:35 PM12 नवंबर
2018
सोमवार 12:03 AM
19 नवंबर
2018
सोमवार 05:56 PM21 नवंबर
2018
बुधवार 06:32 PM
28 नवंबर
2018
बुधवार 08:10 AM30 नवंबर
2018
शुक्रवार 05:22 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र दिसंबर 2018
7 दिसंबर
2018
शुक्रवार 04:36 AM9 दिसंबर
2018
रविवार 08:08 AM
17 दिसंबर
2018
सोमवार 03:09 AM19 दिसंबर
2018
बुधवार 04:39 AM
25 दिसंबर
2018
मंगलवार 03:56 PM27 दिसंबर
2018
गुरूवार 11:42 AM

गंडमूल

हिंदू नक्षत्र में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है, जिसमें कुछ नक्षत्र शुभ है और कुछ अशुभ माने गये हैं। इन अशुभ नक्षत्रों को गंडमूल कहा जाता है।ज्योतिष के अनुसार, इस श्रेणी में आने वाले नक्षत्र हैं अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। इन नक्षत्रों का आप पर शुभ और अशुभ प्रभाव पड़ता है। गंडमूल नक्षत्र में पैदा हुए बच्चों के जीवन में विभिन्न बाधाओं और समस्याएं आती हैं और इन समस्याओं के निवारण के लिए पूजा की आवश्यकता होती है ।

27 नक्षत्रों में केतु व बुध के अधिकार में आने वाले नक्षत्र गंडमूल कहलाते हैं। ये गंडमूल नक्षत्र अपने अंदर अशुभ व मारक प्रभाव रखते हैं ।

1- अश्विनी नक्षत्र- इस नक्षत्र का स्वामी केतु है और देवता अश्विनी कुमार हैं।

2- अश्लेषा नक्षत्र- बुध इस नक्षत्र के स्वामी हैं और सर्प देवता हैं।

3- मघा नक्षत्र- यह केतु का नक्षत्र हैं और पितृ देवता है।

4- ज्येष्ठा नक्षत्र- इस नक्षत्र के स्वामी बुध है और इंद्र देवता हैं।

5- मूल नक्षत्र- मूल नक्षत्र के स्वामी केतु है और राक्षस इसके देवता है।

6- रेवती नक्षत्र- इसके स्वामी बुध हैं और पूषा इसके देवता है।

क्यों होता है गंडमूल नक्षत्र

हिंदू ज्योतिष के अनुसार नक्षत्र, राशि और लग्न के संधि काल को अशुभ माना जाता है और गंडमूल नक्षत्र संधि नक्षत्र होत हैं इसलिए आप पर इसका अशुभ प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। गंडमूल नक्षत्रों के देवता भी बुरे प्रभाव प्रदान करते हैं। ये नक्षत्र मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु व मीन राशि के आरंभ व अंत में आते हैं। इन राशियों का प्रभाव आपके शरीर, मन, बुद्धि, आयु, भाग्य आदि पर पड़ता है और गंडमूल का प्रभाव भी इन्हीं के ऊपर देखने को मिलता है ।

गंडमूल दोष का प्रभाव

यदि कोई आप गंडमूल नक्षत्र में पैदा होते हैं तो आपको और आपके परिजनों को निम्न कष्टों का सामना करना पड़ सकता है-

1- आपको स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का सामना करना पड़ता है ।

1- आपके माता पिता व भाई बहनों के जीवन पर बाधाएं आती हैं ।

1- आपके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।

1- आपको जीवनयापन में संघर्ष का सामना करना पड़ता है ।

1- परिवार में दरिद्रता आती है ।

1- दुर्घटना का भय बना रहता है ।

आपको बता दें कि मघा नक्षत्र के पहले दो चरण में ही माता और पिता को कष्ट होता है, बाकी के दो चरणों में बच्चे को अच्छा खासा धन व उच्च शिक्षा प्राप्त होती है ।

उपचार-

गंडमूल अश्विनी, मूल या मग में पैदा हुए है तो नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करें, बुधवार या गुरुवार को भूरे रंग के कपड़े दान करें।बच्चे के जन्म के 27वें दिन बाद शांति पूजा किया जाना चाहिए और जब तक शांति पूजा ना हो जाए तब तक पिता को बच्चे का चेहरा नहीं देखना चाहिए ।

गंडमूल अश्लेषा, ज्येष्ठ और रेवती में पैदा हुए बच्चे के लिए बुधवार को हरी सब्जियां, धनिया, पन्ना, भूरे रंग के बर्तन और आंवला का दान करें। शिशु पूजा बच्चे के जन्म के 37वें दिन बाद किया जाना चाहिए, लेकिन 10वीं या 19वें दिन भी किया जा सकता है। यदि ऐसा करना संभव नहीं है तो चंद्रमा जन्म नक्षत्र स्थिति में लौटने पर शांति पूजा करें ।