मासिक पंचांग

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  • 7 December 2022 मासिक पंचांग
    मृगशिरा – मृगशिरा विक्रम संवत : 2079
    Sunday
    रविवार
    शुक्ल चतुर्थी
    शुक्ल द्वादशी
    कृष्ण तृतीया
    कृष्ण दशमी
    हस्त कन्या
    शुक्ल द्धितीय
    Monday
    सोमवार
    शुक्ल पंचमी
    शुक्ल त्र्योदशी
    कृष्ण चतुर्थी
    पुष्य कर्क
    कृष्ण एकादशी
    चित्रा तुला
    शुक्ल चतुर्थी
    Tuesday
    मंगलवारर
    शुक्ल षष्ठी
    शुक्ल चतुर्दशी
    भरणी मेष
    कृष्ण पंचमी
    कृष्ण द्वादशी
    स्वाति तुला
    शुक्ल पंचमी
    धनिष्ठाकुम्भ
    Wednesday
    बुधवार
    शुक्ल -षष्ठी
    धनिष्ठाकुम्भ
    शुक्ल चतुर्दशी
    कृष्ण षष्ठी
    मघा सिंह
    कृष्ण त्र्योदशी
    विशाखा वृश्चिक
    शुक्ल षष्ठी
    शतभिसा कुम्भ
    Thursday
    गुरूवार
    शुक्ल -अष्टमी
    पूर्णिमा
    कृष्ण सप्तमी
    कृष्ण चतुर्दशी
    ज्येष्ठा वृश्चिक
    शुक्ल -षष्ठी
    Friday
    शुक्रवार
    शुक्ल -दशमी
    कृष्ण प्रतिपदा
    मृगशिरा मिथुन
    कृष्ण अष्टमी
    अमावश्या
    मूल धनु
    शुक्ल -अष्टमी
    Saturday
    शनिवार
    शुक्ल -एकादशी
    कृष्ण द्धितीय
    आर्द्रा मिथुन
    कृष्ण नवमी
    शुक्ल प्रतिपदा
    शुक्ल-नवमी

    मासिक पंचांग

    पौराणिक मान्यता के अनुसार ब्रह्माजी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसी दिन भगवान विष्णु ने दशावतार में से पहला मत्स्य अवतार लेकर प्रलयकाल में अथाह जलराशि में से मनु की नौका को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था। प्रलयकाल समाप्त होने पर मनु से ही नई सृष्टि की शुरुआत हुई।

    मासिक पंचांग का चलनप्राचीन काल से प्रमुख स्थान रहा है। कैलेंडर का सबसे प्रमुख उल्लेख वेदों में पाया गया है, जो कि, 1200 ईसा पू से हिंदू नैतिक प्रणाली का प्रमुख आधार है।हिंदू कैलेंडर को बनाने में तारों की सहायता ली गई और सूर्य व चंद्रमा की खगोलीय घटना का सहारा लिया गया। पंचांग के पांच अंगों को जमाया गया। जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के जरिए खगोलीय पिंडों पर नजर रखी जाने लगी। आज खगोलीय घटना को देखने के लिए आकाश की ओर नजर उठाकर देखने की जरुरत नहीं है बल्कि पंचांग की गणनाओं को देखकर भी सबकुछ बताया जा सकता है।

    चंद्रमा की गति से दिन और मास का निर्धारण होता है। वहीं सूर्य की गति से वर्ष का निर्धारण होता है। चंद्र मास और सौर वर्ष मिलकर एक विक्रम संवत् बनाते हैं। यह ना केवल तिथि की जानकारी देता है बल्कि यह भी तय करता है कि मौसम इस वर्ष था, ठीक एक वर्ष बाद किस दिन ठीक ऐसा ही मौसम रहेगा।

    हमारे त्योहार, उत्सव और उपवास तक हिंदू कैलेंडर के अनुरूप चलते हैं। आपको बताते हैं इसकी गणना

    - प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के 15-15 दिन होते हैं।

    - जब रात अंधेरी तो कृष्ण पक्ष और जब उजली तो शुक्ल पक्ष।

    - पहले दिन को एकम या प्रतिपदा बोला जाता है, फिर द्वितीय या दूज, तृतीया या तीज, चतुर्थी या चौथ, पंचमी, षष्ठी-छठ, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी- तेरस, चतुर्दशी- चौदस।

    - कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस –अमावस्या और शुक्ल पक्ष के अंत को पूनम- पूर्णिमा बोला जाता है।

    - छह ऋतुओं के दो- दो माह होते है- बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त और शिशिर।

    - वर्ष में दो अयन होते है जिन्हें दक्षिणायन और उत्तरायण कहते हैं।