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2022 में गण्ड मूल नक्षत्र कब होगा | 2022 में गण्ड मूल नक्षत्र के दिन और समय | गंडमूल नक्षत्र 2022

2022 भद्रा दोष

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भद्रा 2022

आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जनवरी 2022
31 दिसंबर
2022
शुक्रवार 10:04 PM2 जनवरी
2022
रविवार 04:23 PM
9 जनवरी
2022
रविवार 07:10 AM11 जनवरी
2022
मंगलवार 11:10 AM
19 जनवरी
2022
बुधवार 06:43 AM21 जनवरी
2022
शुक्रवार 09:43 AM
28 जनवरी
2022
शुक्रवार 07:10 AM30 जनवरी
2022
रविवार 02:49 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र फ़रवरी 2022
5 फ़रवरी
2022
शनिवार 04:09 PM7 फ़रवरी
2022
सोमवार 06:59 PM
15 फ़रवरी
2022
मंगलवार 01:49 PM17 फ़रवरी
2022
गुरूवार 04:11 PM
24 फ़रवरी
2022
गुरूवार 01:31 PM26 फ़रवरी
2022
शनिवार 10:32 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मार्च 2022
5 मार्च
2022
शनिवार 01:52 AM7 मार्च
2022
सोमवार 03:51 AM
14 मार्च
2022
सोमवार 10:08 PM17 मार्च
2022
गुरूवार 12:21 AM
23 मार्च
2022
बुधवार 06:53 PM25 मार्च
2022
शुक्रवार 04:07 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अप्रैल 2022
1 अप्रैल
2022
शुक्रवार 10:40 AM3 अप्रैल
2022
रविवार 12:37 PM
11 अप्रैल
2022
सोमवार 06:51 AM13 अप्रैल
2022
बुधवार 09:37 AM
20 अप्रैल
2022
बुधवार 01:39 AM21 अप्रैल
2022
गुरूवार 09:52 PM
28 अप्रैल
2022
गुरूवार 05:40 PM30 अप्रैल
2022
शनिवार 08:13 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मई 2022
8 मई
2022
रविवार 02:58 PM10 मई
2022
मंगलवार 06:40 PM
17 मई
2022
मंगलवार 10:46 AM19 मई
2022
गुरूवार 05:37 AM
25 मई
2022
बुधवार 11:20 PM28 मई
2022
शनिवार 02:26 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जून 2022
4 जून
2022
शनिवार 09:55 PM7 जून
2022
मंगलवार 02:26 AM
13 जून
2022
सोमवार 09:24 PM15 जून
2022
बुधवार 03:33 PM
22 जून
2022
बुधवार 05:03 AM24 जून
2022
शुक्रवार 08:04 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जुलाई 2022
2 जुलाई
2022
शनिवार 03:56 AM4 जुलाई
2022
सोमवार 08:44 AM
11 जुलाई
2022
सोमवार 07:50 AM13 जुलाई
2022
बुधवार 02:21 AM
19 जुलाई
2022
मंगलवार 12:12 PM21 जुलाई
2022
गुरूवार 02:17 PM
29 जुलाई
2022
शुक्रवार 09:47 AM31 जुलाई
2022
रविवार 02:20 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अगस्त 2022
7 अगस्त
2022
रविवार 04:30 PM9 अगस्त
2022
मंगलवार 12:18 PM
15 अगस्त
2022
सोमवार 09:07 PM17 अगस्त
2022
बुधवार 09:57 PM
25 अगस्त
2022
गुरूवार 04:16 PM27 अगस्त
2022
शनिवार 08:26 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र सितंबर 2022
3 सितंबर
2022
शनिवार 10:57 PM5 सितंबर
2022
सोमवार 08:06 PM
12 सितंबर
2022
सोमवार 06:59 AM14 सितंबर
2022
बुधवार 06:58 AM
21 सितंबर
2022
बुधवार 11:47 PM24 सितंबर
2022
शनिवार 03:51 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अक्टूबर 2022
1 अक्टूबर
2022
शनिवार 04:19 AM3 अक्टूबर
2022
सोमवार 01:53 AM
9 अक्टूबर
2022
रविवार 04:21 PM11 अक्टूबर
2022
मंगलवार 04:17 PM
19 अक्टूबर
2022
बुधवार 08:02 AM21 अक्टूबर
2022
शुक्रवार 12:28 PM
28 अक्टूबर
2022
शुक्रवार 10:42 AM30 अक्टूबर
2022
रविवार 07:26 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र नवंबर 2022
5 नवंबर
2022
शनिवार 11:56 PM8 नवंबर
2022
मंगलवार 12:37 AM
15 नवंबर
2022
मंगलवार 04:13 PM17 नवंबर
2022
गुरूवार 09:21 PM
24 नवंबर
2022
गुरूवार 07:37 PM26 नवंबर
2022
शनिवार 02:58 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र दिसंबर 2022
3 दिसंबर
2022
शनिवार 05:45 AM5 दिसंबर
2022
सोमवार 07:15 AM
12 दिसंबर
2022
सोमवार 11:36 PM15 दिसंबर
2022
गुरूवार 05:16 AM
22 दिसंबर
2022
गुरूवार 06:33 AM24 दिसंबर
2022
शनिवार 01:13 AM
30 दिसंबर
2022
शुक्रवार 11:24 AM1 जनवरी
2022
रविवार 12:48 PM

गंडमूल

हिंदू नक्षत्र में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है, जिसमें कुछ नक्षत्र शुभ है और कुछ अशुभ माने गये हैं। इन अशुभ नक्षत्रों को गंडमूल कहा जाता है।ज्योतिष के अनुसार, इस श्रेणी में आने वाले नक्षत्र हैं अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। इन नक्षत्रों का आप पर शुभ और अशुभ प्रभाव पड़ता है। गंडमूल नक्षत्र में पैदा हुए बच्चों के जीवन में विभिन्न बाधाओं और समस्याएं आती हैं और इन समस्याओं के निवारण के लिए पूजा की आवश्यकता होती है ।

27 नक्षत्रों में केतु व बुध के अधिकार में आने वाले नक्षत्र गंडमूल कहलाते हैं। ये गंडमूल नक्षत्र अपने अंदर अशुभ व मारक प्रभाव रखते हैं ।

1- अश्विनी नक्षत्र- इस नक्षत्र का स्वामी केतु है और देवता अश्विनी कुमार हैं।

2- अश्लेषा नक्षत्र- बुध इस नक्षत्र के स्वामी हैं और सर्प देवता हैं।

3- मघा नक्षत्र- यह केतु का नक्षत्र हैं और पितृ देवता है।

4- ज्येष्ठा नक्षत्र- इस नक्षत्र के स्वामी बुध है और इंद्र देवता हैं।

5- मूल नक्षत्र- मूल नक्षत्र के स्वामी केतु है और राक्षस इसके देवता है।

6- रेवती नक्षत्र- इसके स्वामी बुध हैं और पूषा इसके देवता है।

क्यों होता है गंडमूल नक्षत्र

हिंदू ज्योतिष के अनुसार नक्षत्र, राशि और लग्न के संधि काल को अशुभ माना जाता है और गंडमूल नक्षत्र संधि नक्षत्र होत हैं इसलिए आप पर इसका अशुभ प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। गंडमूल नक्षत्रों के देवता भी बुरे प्रभाव प्रदान करते हैं। ये नक्षत्र मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु व मीन राशि के आरंभ व अंत में आते हैं। इन राशियों का प्रभाव आपके शरीर, मन, बुद्धि, आयु, भाग्य आदि पर पड़ता है और गंडमूल का प्रभाव भी इन्हीं के ऊपर देखने को मिलता है ।

गंडमूल दोष का प्रभाव

यदि कोई आप गंडमूल नक्षत्र में पैदा होते हैं तो आपको और आपके परिजनों को निम्न कष्टों का सामना करना पड़ सकता है-

1- आपको स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का सामना करना पड़ता है ।

1- आपके माता पिता व भाई बहनों के जीवन पर बाधाएं आती हैं ।

1- आपके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।

1- आपको जीवनयापन में संघर्ष का सामना करना पड़ता है ।

1- परिवार में दरिद्रता आती है ।

1- दुर्घटना का भय बना रहता है ।

आपको बता दें कि मघा नक्षत्र के पहले दो चरण में ही माता और पिता को कष्ट होता है, बाकी के दो चरणों में बच्चे को अच्छा खासा धन व उच्च शिक्षा प्राप्त होती है ।

उपचार-

गंडमूल अश्विनी, मूल या मग में पैदा हुए है तो नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करें, बुधवार या गुरुवार को भूरे रंग के कपड़े दान करें।बच्चे के जन्म के 27वें दिन बाद शांति पूजा किया जाना चाहिए और जब तक शांति पूजा ना हो जाए तब तक पिता को बच्चे का चेहरा नहीं देखना चाहिए ।

गंडमूल अश्लेषा, ज्येष्ठ और रेवती में पैदा हुए बच्चे के लिए बुधवार को हरी सब्जियां, धनिया, पन्ना, भूरे रंग के बर्तन और आंवला का दान करें। शिशु पूजा बच्चे के जन्म के 37वें दिन बाद किया जाना चाहिए, लेकिन 10वीं या 19वें दिन भी किया जा सकता है। यदि ऐसा करना संभव नहीं है तो चंद्रमा जन्म नक्षत्र स्थिति में लौटने पर शांति पूजा करें ।