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हिंदी कैलेंडर

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11, चैत्र
शुक्ल पक्ष, एकादशी
2081 कालयुक्ति, विक्रम संवत
Delhi, India
19
अप्रैल 2024
शुक्रवार
अप्रैल, 2024 कैलेंडर
रविवार
सोमवार
मंगलवार
बुधवार
गुरुवार
शुक्रवार
शनिवार
K षष्ठी
ईस्टर
K सप्तमी
शीतला सप्तमी कालाष्टमी बैंक अवकाश
K अष्टमी
बसोड़ा शीतला अष्टमी वर्षी तप आरम्भ
K एकादशी
पापमोचिनी एकादशी जमात उल-विदा
K द्वादशी
प्रदोष व्रत शनि त्रयोदशी
K त्रयोदशी
मासिक शिवरात्रि
K अमावस्या
चैत्र अमावस्या दर्श अमावस्या सोमवती अमावस्या सूर्य ग्रहण
S प्रतिपदा
चन्द्र दर्शन चैत्र नवरात्रि गुड़ी पड़वा युगादी
S द्वितीया
झूलेलाल जयन्ती ईद उल-फ़ित्र रमज़ान
S तृतीया
गौरीपूजा गणगौर मत्स्य जयन्ती मासिक कार्तिगाई
S चतुर्थी
विनायक चतुर्थी लक्ष्मी पञ्चमी रोहिणी व्रत
S पंचमी
स्कन्द षष्ठी सोलर नववर्ष मेष संक्रान्ति बैसाखी
S षष्ठी
यमुना छठ पुथन्डू विषु कानी पहेला वैशाख अम्बेडकर जयन्ती
S सप्तमी
नवपद ओली प्रारम्भ
S अष्टमी
मासिक दुर्गाष्टमी महातारा जयन्ती
S नवमी
राम नवमी
S एकादशी
कामदा एकादशी
S द्वादशी
वामन द्वादशी थ्रिस्सूर पूरम
S त्रयोदशी
प्रदोष व्रत महावीर स्वामी जयन्ती
S चतुर्दशी
S पूर्णिमा
हनुमान जयन्ती चैत्र पूर्णिमा पूर्णिमा उपवास नवपद ओली पूर्ण चित्रा पूर्णनामी
K प्रतिपदा
वैशाख प्रारम्भ *उत्तर
K प्रतिपदा
K तृतीया
संकष्टी चतुर्थी
K चतुर्थी
K सप्तमी
कालाष्टमी
K एकादशी
बरूथिनी एकादशी वल्लभाचार्य जयन्ती अग्नि नक्षत्रम् प्रारम्भ
पंचक अप्रैल, 2024
05-Apr 07:09 AM to 09-Apr 07:31 AM
गण्डमूल अप्रैल, 2024
08-Apr 10:12 AM to 10-Apr 05:06 AM
17-Apr 05:15 AM to 19-Apr 10:56 AM
27-Apr 03:39 AM to 29-Apr 04:48 AM
भद्रा अप्रैल, 2024
31-Mar 09:31 PM to 01-Apr 09:25 AM
04-Apr 05:26 AM to 04-Apr 04:14 PM
07-Apr 06:54 AM to 07-Apr 05:08 PM
12-Apr 02:02 AM to 12-Apr 01:12 PM
15-Apr 12:12 PM to 16-Apr 12:43 AM
19-Apr 06:47 AM to 19-Apr 08:05 PM
23-Apr 03:26 AM to 23-Apr 04:25 PM
26-Apr 08:06 PM to 27-Apr 08:18 AM
30-Apr 07:05 AM to 30-Apr 06:29 PM
पंचांग अप्रैल, 19 2024
सूर्योदय: 05:52:34 AM
सूर्यास्त: 06:50:10 PM
चंद्रोदय: 02:54:29 PM
चंद्रास्त: 03:29:25 AM
विक्रम सम्वत: 2081 कालयुक्ति
शक सम्वत:1946 क्रोधी
अमान्त महीना:चैत्र
पूर्णिमान्त महीना:चैत्र
वार:शुक्रवार
पक्ष: शुक्ल
तिथि: एकादशी upto 08:05
नक्षत्र: मघा upto 10:56
योग: वृद्धि upto 01:42
करण:वणिज upto 06:47
सूर्य राशि:मेष
चन्द्र राशि:सिंह
राहुकाल:10:42 - 12:20
गुलिक काल:07:27 - 09:05
यमगण्ड:15:35 - 17:13
अभिजित मुहूर्त:11:53 to 11:53
दुर्मुहूर्त: 08:25 - 09:18
Dur Muhurtam: 12:46 - 13:38
अमृत काल:08:14 - 10:02
वर्ज्य:19:59 - 05:30

हिंदी कैलेंडर

पौराणिक मान्यता के अनुसार ब्रह्माजी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसी दिन भगवान विष्णु ने दशावतार में से पहला मत्स्य अवतार लेकर प्रलयकाल में अथाह जलराशि में से मनु की नौका को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था। प्रलयकाल समाप्त होने पर मनु से ही नई सृष्टि की शुरुआत हुई।

मासिक पंचांग का चलनप्राचीन काल से प्रमुख स्थान रहा है। कैलेंडर का सबसे प्रमुख उल्लेख वेदों में पाया गया है, जो कि, 1200 ईसा पू से हिंदू नैतिक प्रणाली का प्रमुख आधार है।हिंदू कैलेंडर को बनाने में तारों की सहायता ली गई और सूर्य व चंद्रमा की खगोलीय घटना का सहारा लिया गया। पंचांग के पांच अंगों को जमाया गया। जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के जरिए खगोलीय पिंडों पर नजर रखी जाने लगी। आज खगोलीय घटना को देखने के लिए आकाश की ओर नजर उठाकर देखने की जरुरत नहीं है बल्कि पंचांग की गणनाओं को देखकर भी सबकुछ बताया जा सकता है।

चंद्रमा की गति से दिन और मास का निर्धारण होता है। वहीं सूर्य की गति से वर्ष का निर्धारण होता है। चंद्र मास और सौर वर्ष मिलकर एक विक्रम संवत् बनाते हैं। यह ना केवल तिथि की जानकारी देता है बल्कि यह भी तय करता है कि मौसम इस वर्ष था, ठीक एक वर्ष बाद किस दिन ठीक ऐसा ही मौसम रहेगा।

हमारे त्योहार, उत्सव और उपवास तक हिंदू कैलेंडर के अनुरूप चलते हैं। आपको बताते हैं इसकी गणना

- प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के 15-15 दिन होते हैं।

- जब रात अंधेरी तो कृष्ण पक्ष और जब उजली तो शुक्ल पक्ष।

- पहले दिन को एकम या प्रतिपदा बोला जाता है, फिर द्वितीय या दूज, तृतीया या तीज, चतुर्थी या चौथ, पंचमी, षष्ठी-छठ, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी- तेरस, चतुर्दशी- चौदस।

- कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस –अमावस्या और शुक्ल पक्ष के अंत को पूनम- पूर्णिमा बोला जाता है।

- छह ऋतुओं के दो- दो माह होते है- बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त और शिशिर।

- वर्ष में दो अयन होते है जिन्हें दक्षिणायन और उत्तरायण कहते हैं।