Birthastro Menu

हिंदी कैलेंडर

2, भाद्रपद
शुक्ल पक्ष, द्वितीया
2083 रोद्र, विक्रम संवत
Delhi, India
13
September 2026
रविवार
सितंबर, 2026 कैलेंडर
रविवार
सोमवार
मंगलवार
बुधवार
गुरुवार
शुक्रवार
शनिवार
K तृतीया
कजरी तीज संकष्टी चतुर्थी संकटहरा चतुर्थी *तमिल बोल चौथ *गुजरात
K चतुर्थी
नाग पञ्चम *गुजरात
K पंचमी
बलराम जयन्ती रांधण छठ *गुजरात
K सप्तमी
शीतला सातम *गुजरात मासिक कार्तिगाई
K अष्टमी
कृष्ण जन्माष्टमी कालाष्टमी आद्याकाली जयन्ती अष्टमी रोहिणी रोहिणी व्रत
K नवमी
दही हाण्डी
K एकादशी
अजा एकादशी
K द्वादशी
पर्यूषण पर्वारम्भ प्रदोष व्रत
K त्रयोदशी
मासिक शिवरात्रि
K चतुर्दशी
दर्श अमावस्या
K अमावस्या
भाद्रपद अमावस्या पिठोरी अमावस्या पोला वृषभोत्सव
S प्रतिपदा
चन्द्र दर्शन सामवेद उपाकर्म
S द्वितीया
वराह जयन्ती
S तृतीया
हरतालिका तीज गौरी हब्बा गणेश चतुर्थी
S चतुर्थी
ऋषि पञ्चमी सम्वत्सरी पर्व
S पंचमी
स्कन्द षष्ठी
S षष्ठी
गौरी आवाहन कन्या संक्रान्ति विश्वकर्मा पूजा
S सप्तमी
ललिता सप्तमी दूर्वा अष्टमी गौरी पूजा
S अष्टमी
राधा अष्टमी मासिक दुर्गाष्टमी महालक्ष्मी व्रत आरम्भ गौरी विसर्जन
S एकादशी
परिवर्तिनी एकादशी
S द्वादशी
वामन जयन्ती कल्की द्वादशी भुवनेश्वरी जयन्ती शरद्कालीन सम्पात
S त्रयोदशी
प्रदोष व्रत
S चतुर्दशी
अनन्त चतुर्दशी गणेश विसर्जन
S पूर्णिमा
भाद्रपद पूर्णिमा पूर्णिमा उपवास पूर्णिमा श्राद्ध
K प्रतिपदा
आश्विन प्रारम्भ *उत्तर प्रतिपदा श्राद्ध
K द्वितीया
द्वितीया श्राद्ध
K तृतीया
महा भरणी तृतीया श्राद्ध संकष्टी चतुर्थी
K चतुर्थी
चतुर्थी श्राद्ध पञ्चमी श्राद्ध
K पंचमी
षष्ठी श्राद्ध रोहिणी व्रत
K षष्ठी
सप्तमी श्राद्ध गाँधी जयन्ती
K सप्तमी
अष्टमी श्राद्ध जीवितपुत्रिका व्रत कालाष्टमी महालक्ष्मी व्रत पूर्ण
पंचक September, 2026
23-Sep 09:52 PM to 28-Sep 10:16 AM
गण्डमूल September, 2026
08-Sep 04:39 PM to 10-Sep 02:04 PM
17-Sep 07:53 PM to 20-Sep 01:43 AM
27-Sep 11:08 AM to 29-Sep 09:03 AM
भद्रा September, 2026
03-Sep 04:26 AM to 03-Sep 03:27 PM
06-Sep 08:41 AM to 06-Sep 07:29 PM
09-Sep 12:30 PM to 09-Sep 11:29 PM
14-Sep 07:20 PM to 15-Sep 07:44 AM
18-Sep 01:01 PM to 19-Sep 02:13 AM
22-Sep 08:56 AM to 22-Sep 09:43 PM
25-Sep 11:06 PM to 26-Sep 10:46 AM
29-Sep 06:13 AM to 29-Sep 05:10 PM
पंचांग September, 13 2026
सूर्योदय: 06:06:17 AM
सूर्यास्त: 06:31:09 PM
चंद्रोदय: 08:08:11 AM
चंद्रास्त: 07:40:32 PM
विक्रम सम्वत: 2083 रोद्र
शक सम्वत:1948 पराभव
अमान्त महीना:भाद्रपद
पूर्णिमान्त महीना:भाद्रपद
वार:रविवार
पक्ष: शुक्ल
तिथि: द्वितीया upto 07:08
नक्षत्र: हस्त upto 01:06
योग: शुक्ल upto 01:42
करण:कौलव upto 07:08
सूर्य राशि:सिंह
चन्द्र राशि:कन्या
राहुकाल:16:57 - 18:30
गुलिक काल:15:23 - 16:57
यमगण्ड:12:17 - 13:50
अभिजित मुहूर्त:11:52 to 11:52
दुर्मुहूर्त: 16:50 - 17:40
अमृत काल:07:04 - 08:40
वर्ज्य:21:23 - 05:30

हिंदी कैलेंडर

पौराणिक मान्यता के अनुसार ब्रह्माजी ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही सृष्टि की रचना शुरू की थी। इसी दिन भगवान विष्णु ने दशावतार में से पहला मत्स्य अवतार लेकर प्रलयकाल में अथाह जलराशि में से मनु की नौका को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया था। प्रलयकाल समाप्त होने पर मनु से ही नई सृष्टि की शुरुआत हुई।

मासिक पंचांग का चलनप्राचीन काल से प्रमुख स्थान रहा है। कैलेंडर का सबसे प्रमुख उल्लेख वेदों में पाया गया है, जो कि, 1200 ईसा पू से हिंदू नैतिक प्रणाली का प्रमुख आधार है।हिंदू कैलेंडर को बनाने में तारों की सहायता ली गई और सूर्य व चंद्रमा की खगोलीय घटना का सहारा लिया गया। पंचांग के पांच अंगों को जमाया गया। जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के जरिए खगोलीय पिंडों पर नजर रखी जाने लगी। आज खगोलीय घटना को देखने के लिए आकाश की ओर नजर उठाकर देखने की जरुरत नहीं है बल्कि पंचांग की गणनाओं को देखकर भी सबकुछ बताया जा सकता है।

चंद्रमा की गति से दिन और मास का निर्धारण होता है। वहीं सूर्य की गति से वर्ष का निर्धारण होता है। चंद्र मास और सौर वर्ष मिलकर एक विक्रम संवत् बनाते हैं। यह ना केवल तिथि की जानकारी देता है बल्कि यह भी तय करता है कि मौसम इस वर्ष था, ठीक एक वर्ष बाद किस दिन ठीक ऐसा ही मौसम रहेगा।

हमारे त्योहार, उत्सव और उपवास तक हिंदू कैलेंडर के अनुरूप चलते हैं। आपको बताते हैं इसकी गणना

- प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के 15-15 दिन होते हैं।

- जब रात अंधेरी तो कृष्ण पक्ष और जब उजली तो शुक्ल पक्ष।

- पहले दिन को एकम या प्रतिपदा बोला जाता है, फिर द्वितीय या दूज, तृतीया या तीज, चतुर्थी या चौथ, पंचमी, षष्ठी-छठ, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी- तेरस, चतुर्दशी- चौदस।

- कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस –अमावस्या और शुक्ल पक्ष के अंत को पूनम- पूर्णिमा बोला जाता है।

- छह ऋतुओं के दो- दो माह होते है- बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमन्त और शिशिर।

- वर्ष में दो अयन होते है जिन्हें दक्षिणायन और उत्तरायण कहते हैं।