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2027 में गण्ड मूल नक्षत्र कब होगा | 2027 में गण्ड मूल नक्षत्र के दिन और समय | गंडमूल नक्षत्र 2027

2027 भद्रा दोष

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भद्रा 2027

आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जनवरी 2027
5 जनवरी
2027
मंगलवार 12:14 AM7 जनवरी
2027
गुरूवार 06:08 AM
14 जनवरी
2027
गुरूवार 11:18 PM16 जनवरी
2027
शनिवार 11:38 PM
23 जनवरी
2027
शनिवार 07:31 AM25 जनवरी
2027
सोमवार 02:40 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र फ़रवरी 2027
1 फ़रवरी
2027
सोमवार 06:27 AM3 फ़रवरी
2027
बुधवार 12:26 PM
11 फ़रवरी
2027
गुरूवार 04:56 AM13 फ़रवरी
2027
शनिवार 05:56 AM
19 फ़रवरी
2027
शुक्रवार 06:35 PM21 फ़रवरी
2027
रविवार 01:50 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मार्च 2027
28 फ़रवरी
2027
रविवार 01:47 PM2 मार्च
2027
मंगलवार 07:27 PM
10 मार्च
2027
बुधवार 10:52 AM12 मार्च
2027
शुक्रवार 11:22 AM
19 मार्च
2027
शुक्रवार 03:21 AM20 मार्च
2027
शनिवार 11:44 PM
27 मार्च
2027
शनिवार 10:14 PM30 मार्च
2027
मंगलवार 03:18 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अप्रैल 2027
6 अप्रैल
2027
मंगलवार 06:23 PM8 अप्रैल
2027
गुरूवार 05:59 PM
15 अप्रैल
2027
गुरूवार 09:33 AM17 अप्रैल
2027
शनिवार 07:08 AM
24 अप्रैल
2027
शनिवार 06:56 AM26 अप्रैल
2027
सोमवार 11:29 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मई 2027
4 मई
2027
मंगलवार 03:19 AM6 मई
2027
गुरूवार 02:31 AM
12 मई
2027
बुधवार 02:55 PM14 मई
2027
शुक्रवार 12:42 PM
21 मई
2027
शुक्रवार 02:51 PM23 मई
2027
रविवार 07:17 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जून 2027
31 मई
2027
सोमवार 12:35 PM2 जून
2027
बुधवार 12:16 PM
8 जून
2027
मंगलवार 09:36 PM10 जून
2027
गुरूवार 06:23 PM
17 जून
2027
गुरूवार 09:30 PM20 जून
2027
रविवार 02:12 AM
27 जून
2027
रविवार 08:58 PM29 जून
2027
मंगलवार 09:48 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जुलाई 2027
6 जुलाई
2027
मंगलवार 06:33 AM8 जुलाई
2027
गुरूवार 01:55 AM
15 जुलाई
2027
गुरूवार 03:18 AM17 जुलाई
2027
शनिवार 08:21 AM
25 जुलाई
2027
रविवार 03:52 AM27 जुलाई
2027
मंगलवार 05:53 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अगस्त 2027
2 अगस्त
2027
सोमवार 05:09 PM4 अगस्त
2027
बुधवार 11:36 AM
11 अगस्त
2027
बुधवार 09:13 AM13 अगस्त
2027
शुक्रवार 02:19 PM
21 अगस्त
2027
शनिवार 09:38 AM23 अगस्त
2027
सोमवार 12:11 PM
30 अगस्त
2027
सोमवार 03:44 AM31 अगस्त
2027
मंगलवार 10:20 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र सितंबर 2027
7 सितंबर
2027
मंगलवार 04:16 PM9 सितंबर
2027
गुरूवार 08:52 PM
17 सितंबर
2027
शुक्रवार 03:28 PM19 सितंबर
2027
रविवार 05:40 PM
26 सितंबर
2027
रविवार 12:37 PM28 सितंबर
2027
मंगलवार 08:20 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अक्टूबर 2027
5 अक्टूबर
2027
मंगलवार 12:44 AM7 अक्टूबर
2027
गुरूवार 04:28 AM
14 अक्टूबर
2027
गुरूवार 10:30 PM16 अक्टूबर
2027
शनिवार 11:58 PM
23 अक्टूबर
2027
शनिवार 07:07 PM25 अक्टूबर
2027
सोमवार 04:09 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र नवंबर 2027
1 नवंबर
2027
सोमवार 09:57 AM3 नवंबर
2027
बुधवार 12:57 PM
11 नवंबर
2027
गुरूवार 07:01 AM13 नवंबर
2027
शनिवार 08:10 AM
20 नवंबर
2027
शनिवार 12:27 AM21 नवंबर
2027
रविवार 09:52 PM
28 नवंबर
2027
रविवार 06:40 PM30 नवंबर
2027
मंगलवार 09:29 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र दिसंबर 2027
8 दिसंबर
2027
बुधवार 04:12 PM10 दिसंबर
2027
शुक्रवार 05:54 PM
17 दिसंबर
2027
शुक्रवार 07:07 AM19 दिसंबर
2027
रविवार 03:30 AM
26 दिसंबर
2027
रविवार 01:49 AM28 दिसंबर
2027
मंगलवार 05:06 AM

गंडमूल

हिंदू नक्षत्र में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है, जिसमें कुछ नक्षत्र शुभ है और कुछ अशुभ माने गये हैं। इन अशुभ नक्षत्रों को गंडमूल कहा जाता है।ज्योतिष के अनुसार, इस श्रेणी में आने वाले नक्षत्र हैं अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। इन नक्षत्रों का आप पर शुभ और अशुभ प्रभाव पड़ता है। गंडमूल नक्षत्र में पैदा हुए बच्चों के जीवन में विभिन्न बाधाओं और समस्याएं आती हैं और इन समस्याओं के निवारण के लिए पूजा की आवश्यकता होती है ।

27 नक्षत्रों में केतु व बुध के अधिकार में आने वाले नक्षत्र गंडमूल कहलाते हैं। ये गंडमूल नक्षत्र अपने अंदर अशुभ व मारक प्रभाव रखते हैं ।

1- अश्विनी नक्षत्र- इस नक्षत्र का स्वामी केतु है और देवता अश्विनी कुमार हैं।

2- अश्लेषा नक्षत्र- बुध इस नक्षत्र के स्वामी हैं और सर्प देवता हैं।

3- मघा नक्षत्र- यह केतु का नक्षत्र हैं और पितृ देवता है।

4- ज्येष्ठा नक्षत्र- इस नक्षत्र के स्वामी बुध है और इंद्र देवता हैं।

5- मूल नक्षत्र- मूल नक्षत्र के स्वामी केतु है और राक्षस इसके देवता है।

6- रेवती नक्षत्र- इसके स्वामी बुध हैं और पूषा इसके देवता है।

क्यों होता है गंडमूल नक्षत्र

हिंदू ज्योतिष के अनुसार नक्षत्र, राशि और लग्न के संधि काल को अशुभ माना जाता है और गंडमूल नक्षत्र संधि नक्षत्र होत हैं इसलिए आप पर इसका अशुभ प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। गंडमूल नक्षत्रों के देवता भी बुरे प्रभाव प्रदान करते हैं। ये नक्षत्र मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु व मीन राशि के आरंभ व अंत में आते हैं। इन राशियों का प्रभाव आपके शरीर, मन, बुद्धि, आयु, भाग्य आदि पर पड़ता है और गंडमूल का प्रभाव भी इन्हीं के ऊपर देखने को मिलता है ।

गंडमूल दोष का प्रभाव

यदि कोई आप गंडमूल नक्षत्र में पैदा होते हैं तो आपको और आपके परिजनों को निम्न कष्टों का सामना करना पड़ सकता है-

1- आपको स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का सामना करना पड़ता है ।

1- आपके माता पिता व भाई बहनों के जीवन पर बाधाएं आती हैं ।

1- आपके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।

1- आपको जीवनयापन में संघर्ष का सामना करना पड़ता है ।

1- परिवार में दरिद्रता आती है ।

1- दुर्घटना का भय बना रहता है ।

आपको बता दें कि मघा नक्षत्र के पहले दो चरण में ही माता और पिता को कष्ट होता है, बाकी के दो चरणों में बच्चे को अच्छा खासा धन व उच्च शिक्षा प्राप्त होती है ।

उपचार-

गंडमूल अश्विनी, मूल या मग में पैदा हुए है तो नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करें, बुधवार या गुरुवार को भूरे रंग के कपड़े दान करें।बच्चे के जन्म के 27वें दिन बाद शांति पूजा किया जाना चाहिए और जब तक शांति पूजा ना हो जाए तब तक पिता को बच्चे का चेहरा नहीं देखना चाहिए ।

गंडमूल अश्लेषा, ज्येष्ठ और रेवती में पैदा हुए बच्चे के लिए बुधवार को हरी सब्जियां, धनिया, पन्ना, भूरे रंग के बर्तन और आंवला का दान करें। शिशु पूजा बच्चे के जन्म के 37वें दिन बाद किया जाना चाहिए, लेकिन 10वीं या 19वें दिन भी किया जा सकता है। यदि ऐसा करना संभव नहीं है तो चंद्रमा जन्म नक्षत्र स्थिति में लौटने पर शांति पूजा करें ।