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2025 में गण्ड मूल नक्षत्र कब होगा | 2025 में गण्ड मूल नक्षत्र के दिन और समय | गंडमूल नक्षत्र 2025

2025 भद्रा दोष

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भद्रा 2025

आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जनवरी 2025
6 जनवरी
2025
सोमवार 07:06 PM8 जनवरी
2025
बुधवार 04:29 PM
15 जनवरी
2025
बुधवार 10:28 AM17 जनवरी
2025
शुक्रवार 12:45 PM
25 जनवरी
2025
शनिवार 07:07 AM27 जनवरी
2025
सोमवार 09:02 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र फ़रवरी 2025
3 फ़रवरी
2025
सोमवार 12:52 AM4 फ़रवरी
2025
मंगलवार 09:49 PM
11 फ़रवरी
2025
मंगलवार 06:34 PM13 फ़रवरी
2025
गुरूवार 09:07 PM
21 फ़रवरी
2025
शुक्रवार 03:54 PM23 फ़रवरी
2025
रविवार 06:43 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मार्च 2025
2 मार्च
2025
रविवार 08:59 AM4 मार्च
2025
मंगलवार 04:29 AM
11 मार्च
2025
मंगलवार 12:51 AM13 मार्च
2025
गुरूवार 04:05 AM
20 मार्च
2025
गुरूवार 11:31 PM23 मार्च
2025
रविवार 03:23 AM
29 मार्च
2025
शनिवार 07:26 PM31 मार्च
2025
सोमवार 01:45 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अप्रैल 2025
7 अप्रैल
2025
सोमवार 06:25 AM9 अप्रैल
2025
बुधवार 09:57 AM
17 अप्रैल
2025
गुरूवार 05:55 AM19 अप्रैल
2025
शनिवार 10:21 AM
26 अप्रैल
2025
शनिवार 06:27 AM28 अप्रैल
2025
सोमवार 12:38 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मई 2025
4 मई
2025
रविवार 12:53 PM6 मई
2025
मंगलवार 03:52 PM
14 मई
2025
बुधवार 11:47 AM16 मई
2025
शुक्रवार 04:07 PM
23 मई
2025
शुक्रवार 04:02 PM25 मई
2025
रविवार 11:12 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जून 2025
31 मई
2025
शनिवार 09:07 PM2 जून
2025
सोमवार 10:55 PM
10 जून
2025
मंगलवार 06:02 PM12 जून
2025
गुरूवार 09:57 PM
19 जून
2025
गुरूवार 11:17 PM21 जून
2025
शनिवार 07:50 PM
28 जून
2025
शनिवार 06:35 AM30 जून
2025
सोमवार 07:20 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जुलाई 2025
8 जुलाई
2025
मंगलवार 01:11 AM10 जुलाई
2025
गुरूवार 04:50 AM
17 जुलाई
2025
गुरूवार 04:50 AM19 जुलाई
2025
शनिवार 02:14 AM
25 जुलाई
2025
शुक्रवार 04:00 PM27 जुलाई
2025
रविवार 04:23 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अगस्त 2025
4 अगस्त
2025
सोमवार 09:12 AM6 अगस्त
2025
बुधवार 01:00 PM
13 अगस्त
2025
बुधवार 10:32 AM15 अगस्त
2025
शुक्रवार 07:36 AM
22 अगस्त
2025
शुक्रवार 12:08 AM24 अगस्त
2025
रविवार 12:54 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र सितंबर 2025
31 अगस्त
2025
रविवार 05:27 PM2 सितंबर
2025
मंगलवार 09:51 PM
9 सितंबर
2025
मंगलवार 06:07 PM11 सितंबर
2025
गुरूवार 01:58 PM
18 सितंबर
2025
गुरूवार 06:32 AM20 सितंबर
2025
शनिवार 08:05 AM
28 सितंबर
2025
रविवार 01:08 AM30 सितंबर
2025
मंगलवार 06:17 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अक्टूबर 2025
7 अक्टूबर
2025
मंगलवार 04:01 AM8 अक्टूबर
2025
बुधवार 10:44 PM
15 अक्टूबर
2025
बुधवार 12:00 PM17 अक्टूबर
2025
शुक्रवार 01:57 PM
25 अक्टूबर
2025
शनिवार 07:51 AM27 अक्टूबर
2025
सोमवार 01:27 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र नवंबर 2025
3 नवंबर
2025
सोमवार 03:05 PM5 नवंबर
2025
बुधवार 09:40 AM
11 नवंबर
2025
मंगलवार 06:17 PM13 नवंबर
2025
गुरूवार 07:38 PM
21 नवंबर
2025
शुक्रवार 01:56 PM23 नवंबर
2025
रविवार 07:28 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र दिसंबर 2025
1 दिसंबर
2025
सोमवार 01:11 AM2 दिसंबर
2025
मंगलवार 08:51 PM
9 दिसंबर
2025
मंगलवार 02:52 AM11 दिसंबर
2025
गुरूवार 02:44 AM
18 दिसंबर
2025
गुरूवार 08:07 PM21 दिसंबर
2025
रविवार 01:21 AM
28 दिसंबर
2025
रविवार 08:43 AM30 दिसंबर
2025
मंगलवार 06:04 AM

गंडमूल

हिंदू नक्षत्र में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है, जिसमें कुछ नक्षत्र शुभ है और कुछ अशुभ माने गये हैं। इन अशुभ नक्षत्रों को गंडमूल कहा जाता है।ज्योतिष के अनुसार, इस श्रेणी में आने वाले नक्षत्र हैं अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। इन नक्षत्रों का आप पर शुभ और अशुभ प्रभाव पड़ता है। गंडमूल नक्षत्र में पैदा हुए बच्चों के जीवन में विभिन्न बाधाओं और समस्याएं आती हैं और इन समस्याओं के निवारण के लिए पूजा की आवश्यकता होती है ।

27 नक्षत्रों में केतु व बुध के अधिकार में आने वाले नक्षत्र गंडमूल कहलाते हैं। ये गंडमूल नक्षत्र अपने अंदर अशुभ व मारक प्रभाव रखते हैं ।

1- अश्विनी नक्षत्र- इस नक्षत्र का स्वामी केतु है और देवता अश्विनी कुमार हैं।

2- अश्लेषा नक्षत्र- बुध इस नक्षत्र के स्वामी हैं और सर्प देवता हैं।

3- मघा नक्षत्र- यह केतु का नक्षत्र हैं और पितृ देवता है।

4- ज्येष्ठा नक्षत्र- इस नक्षत्र के स्वामी बुध है और इंद्र देवता हैं।

5- मूल नक्षत्र- मूल नक्षत्र के स्वामी केतु है और राक्षस इसके देवता है।

6- रेवती नक्षत्र- इसके स्वामी बुध हैं और पूषा इसके देवता है।

क्यों होता है गंडमूल नक्षत्र

हिंदू ज्योतिष के अनुसार नक्षत्र, राशि और लग्न के संधि काल को अशुभ माना जाता है और गंडमूल नक्षत्र संधि नक्षत्र होत हैं इसलिए आप पर इसका अशुभ प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। गंडमूल नक्षत्रों के देवता भी बुरे प्रभाव प्रदान करते हैं। ये नक्षत्र मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु व मीन राशि के आरंभ व अंत में आते हैं। इन राशियों का प्रभाव आपके शरीर, मन, बुद्धि, आयु, भाग्य आदि पर पड़ता है और गंडमूल का प्रभाव भी इन्हीं के ऊपर देखने को मिलता है ।

गंडमूल दोष का प्रभाव

यदि कोई आप गंडमूल नक्षत्र में पैदा होते हैं तो आपको और आपके परिजनों को निम्न कष्टों का सामना करना पड़ सकता है-

1- आपको स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का सामना करना पड़ता है ।

1- आपके माता पिता व भाई बहनों के जीवन पर बाधाएं आती हैं ।

1- आपके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।

1- आपको जीवनयापन में संघर्ष का सामना करना पड़ता है ।

1- परिवार में दरिद्रता आती है ।

1- दुर्घटना का भय बना रहता है ।

आपको बता दें कि मघा नक्षत्र के पहले दो चरण में ही माता और पिता को कष्ट होता है, बाकी के दो चरणों में बच्चे को अच्छा खासा धन व उच्च शिक्षा प्राप्त होती है ।

उपचार-

गंडमूल अश्विनी, मूल या मग में पैदा हुए है तो नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करें, बुधवार या गुरुवार को भूरे रंग के कपड़े दान करें।बच्चे के जन्म के 27वें दिन बाद शांति पूजा किया जाना चाहिए और जब तक शांति पूजा ना हो जाए तब तक पिता को बच्चे का चेहरा नहीं देखना चाहिए ।

गंडमूल अश्लेषा, ज्येष्ठ और रेवती में पैदा हुए बच्चे के लिए बुधवार को हरी सब्जियां, धनिया, पन्ना, भूरे रंग के बर्तन और आंवला का दान करें। शिशु पूजा बच्चे के जन्म के 37वें दिन बाद किया जाना चाहिए, लेकिन 10वीं या 19वें दिन भी किया जा सकता है। यदि ऐसा करना संभव नहीं है तो चंद्रमा जन्म नक्षत्र स्थिति में लौटने पर शांति पूजा करें ।