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2020 में गण्ड मूल नक्षत्र कब होगा | 2020 में गण्ड मूल नक्षत्र के दिन और समय | गंडमूल नक्षत्र 2020

2020 भद्रा दोष

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भद्रा 2020

आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जनवरी 2020
3 जनवरी
2020
शुक्रवार 07:20 AM5 जनवरी
2020
रविवार 12:28 PM
12 जनवरी
2020
रविवार 11:50 AM14 जनवरी
2020
मंगलवार 07:55 AM
20 जनवरी
2020
सोमवार 11:30 PM23 जनवरी
2020
गुरूवार 12:20 AM
30 जनवरी
2020
गुरूवार 03:13 PM1 फ़रवरी
2020
शनिवार 08:54 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र फ़रवरी 2020
30 जनवरी
2020
गुरूवार 03:13 PM1 फ़रवरी
2020
शनिवार 08:54 PM
8 फ़रवरी
2020
शनिवार 10:05 PM10 फ़रवरी
2020
सोमवार 05:06 PM
17 फ़रवरी
2020
सोमवार 04:54 AM19 फ़रवरी
2020
बुधवार 06:07 AM
26 फ़रवरी
2020
बुधवार 10:08 PM29 फ़रवरी
2020
शनिवार 04:03 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मार्च 2020
7 मार्च
2020
शनिवार 09:05 AM9 मार्च
2020
सोमवार 04:10 AM
15 मार्च
2020
रविवार 11:24 AM17 मार्च
2020
मंगलवार 11:46 AM
25 मार्च
2020
बुधवार 04:19 AM27 मार्च
2020
शुक्रवार 10:10 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अप्रैल 2020
3 अप्रैल
2020
शुक्रवार 06:41 PM5 अप्रैल
2020
रविवार 02:57 PM
11 अप्रैल
2020
शनिवार 08:12 PM13 अप्रैल
2020
सोमवार 07:03 PM
21 अप्रैल
2020
मंगलवार 10:23 AM23 अप्रैल
2020
गुरूवार 04:05 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र मई 2020
1 मई
2020
शुक्रवार 01:53 AM2 मई
2020
शनिवार 11:40 PM
9 मई
2020
शनिवार 06:33 AM11 मई
2020
सोमवार 04:13 AM
18 मई
2020
सोमवार 04:58 PM20 मई
2020
बुधवार 10:37 PM
28 मई
2020
गुरूवार 07:27 AM30 मई
2020
शनिवार 06:03 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जून 2020
5 जून
2020
शुक्रवार 04:44 PM7 जून
2020
रविवार 02:11 PM
15 जून
2020
सोमवार 12:22 AM17 जून
2020
बुधवार 06:04 AM
24 जून
2020
बुधवार 01:10 PM26 जून
2020
शुक्रवार 11:26 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र जुलाई 2020
3 जुलाई
2020
शुक्रवार 01:14 AM4 जुलाई
2020
शनिवार 11:22 PM
12 जुलाई
2020
रविवार 08:19 AM14 जुलाई
2020
मंगलवार 02:07 PM
21 जुलाई
2020
मंगलवार 08:30 PM23 जुलाई
2020
गुरूवार 05:44 PM
30 जुलाई
2020
गुरूवार 07:41 AM1 अगस्त
2020
शनिवार 06:49 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अगस्त 2020
30 जुलाई
2020
गुरूवार 07:41 AM1 अगस्त
2020
शनिवार 06:49 AM
8 अगस्त
2020
शनिवार 04:12 PM10 अगस्त
2020
सोमवार 10:06 PM
18 अगस्त
2020
मंगलवार 05:44 AM20 अगस्त
2020
गुरूवार 02:07 AM
26 अगस्त
2020
बुधवार 01:04 PM28 अगस्त
2020
शुक्रवार 12:38 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र सितंबर 2020
4 सितंबर
2020
शुक्रवार 11:28 PM7 सितंबर
2020
सोमवार 05:24 AM
14 सितंबर
2020
सोमवार 03:52 PM16 सितंबर
2020
बुधवार 12:21 PM
22 सितंबर
2020
मंगलवार 07:19 PM24 सितंबर
2020
गुरूवार 06:10 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र अक्टूबर 2020
2 अक्टूबर
2020
शुक्रवार 05:57 AM4 अक्टूबर
2020
रविवार 11:53 AM
12 अक्टूबर
2020
सोमवार 01:19 AM13 अक्टूबर
2020
मंगलवार 10:55 PM
20 अक्टूबर
2020
मंगलवार 03:53 AM22 अक्टूबर
2020
गुरूवार 01:13 AM
29 अक्टूबर
2020
गुरूवार 12:00 PM31 अक्टूबर
2020
शनिवार 05:58 PM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र नवंबर 2020
8 नवंबर
2020
रविवार 08:46 AM10 नवंबर
2020
मंगलवार 07:56 AM
16 नवंबर
2020
सोमवार 02:37 PM18 नवंबर
2020
बुधवार 10:40 AM
25 नवंबर
2020
बुधवार 06:21 PM28 नवंबर
2020
शनिवार 12:23 AM
आरम्भ समाप्त
दिनांक दिन समय दिनांक दिन समय
गण्ड मूल नक्षत्र दिसंबर 2020
5 दिसंबर
2020
शनिवार 02:28 PM7 दिसंबर
2020
सोमवार 02:33 PM
14 दिसंबर
2020
सोमवार 01:40 AM15 दिसंबर
2020
मंगलवार 09:31 PM
23 दिसंबर
2020
बुधवार 01:38 AM25 दिसंबर
2020
शुक्रवार 07:37 AM

गंडमूल

हिंदू नक्षत्र में कुल 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है, जिसमें कुछ नक्षत्र शुभ है और कुछ अशुभ माने गये हैं। इन अशुभ नक्षत्रों को गंडमूल कहा जाता है।ज्योतिष के अनुसार, इस श्रेणी में आने वाले नक्षत्र हैं अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। इन नक्षत्रों का आप पर शुभ और अशुभ प्रभाव पड़ता है। गंडमूल नक्षत्र में पैदा हुए बच्चों के जीवन में विभिन्न बाधाओं और समस्याएं आती हैं और इन समस्याओं के निवारण के लिए पूजा की आवश्यकता होती है ।

27 नक्षत्रों में केतु व बुध के अधिकार में आने वाले नक्षत्र गंडमूल कहलाते हैं। ये गंडमूल नक्षत्र अपने अंदर अशुभ व मारक प्रभाव रखते हैं ।

1- अश्विनी नक्षत्र- इस नक्षत्र का स्वामी केतु है और देवता अश्विनी कुमार हैं।

2- अश्लेषा नक्षत्र- बुध इस नक्षत्र के स्वामी हैं और सर्प देवता हैं।

3- मघा नक्षत्र- यह केतु का नक्षत्र हैं और पितृ देवता है।

4- ज्येष्ठा नक्षत्र- इस नक्षत्र के स्वामी बुध है और इंद्र देवता हैं।

5- मूल नक्षत्र- मूल नक्षत्र के स्वामी केतु है और राक्षस इसके देवता है।

6- रेवती नक्षत्र- इसके स्वामी बुध हैं और पूषा इसके देवता है।

क्यों होता है गंडमूल नक्षत्र

हिंदू ज्योतिष के अनुसार नक्षत्र, राशि और लग्न के संधि काल को अशुभ माना जाता है और गंडमूल नक्षत्र संधि नक्षत्र होत हैं इसलिए आप पर इसका अशुभ प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। गंडमूल नक्षत्रों के देवता भी बुरे प्रभाव प्रदान करते हैं। ये नक्षत्र मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु व मीन राशि के आरंभ व अंत में आते हैं। इन राशियों का प्रभाव आपके शरीर, मन, बुद्धि, आयु, भाग्य आदि पर पड़ता है और गंडमूल का प्रभाव भी इन्हीं के ऊपर देखने को मिलता है ।

गंडमूल दोष का प्रभाव

यदि कोई आप गंडमूल नक्षत्र में पैदा होते हैं तो आपको और आपके परिजनों को निम्न कष्टों का सामना करना पड़ सकता है-

1- आपको स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का सामना करना पड़ता है ।

1- आपके माता पिता व भाई बहनों के जीवन पर बाधाएं आती हैं ।

1- आपके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।

1- आपको जीवनयापन में संघर्ष का सामना करना पड़ता है ।

1- परिवार में दरिद्रता आती है ।

1- दुर्घटना का भय बना रहता है ।

आपको बता दें कि मघा नक्षत्र के पहले दो चरण में ही माता और पिता को कष्ट होता है, बाकी के दो चरणों में बच्चे को अच्छा खासा धन व उच्च शिक्षा प्राप्त होती है ।

उपचार-

गंडमूल अश्विनी, मूल या मग में पैदा हुए है तो नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करें, बुधवार या गुरुवार को भूरे रंग के कपड़े दान करें।बच्चे के जन्म के 27वें दिन बाद शांति पूजा किया जाना चाहिए और जब तक शांति पूजा ना हो जाए तब तक पिता को बच्चे का चेहरा नहीं देखना चाहिए ।

गंडमूल अश्लेषा, ज्येष्ठ और रेवती में पैदा हुए बच्चे के लिए बुधवार को हरी सब्जियां, धनिया, पन्ना, भूरे रंग के बर्तन और आंवला का दान करें। शिशु पूजा बच्चे के जन्म के 37वें दिन बाद किया जाना चाहिए, लेकिन 10वीं या 19वें दिन भी किया जा सकता है। यदि ऐसा करना संभव नहीं है तो चंद्रमा जन्म नक्षत्र स्थिति में लौटने पर शांति पूजा करें ।